Friday, 21 February 2020

अर्जित ज्ञान

 अर्जित ज्ञान
 ------प्रभु दयाल खट्टर    

कोयला मात्र एक गौण पत्थर है 
अपनी हथेली पर रखो 
होगा प्रतीत वह -
दीन है ,प्रभावहीन है , 



लेकिन कब तक ?
जब तक अग्निविहीन है.
जब वह आग्नेय हो जाये 
तब यदि कोई उसे बनाये 
निज हथेली का भाग 
तब ही ज्ञात होगा कि 
वह मात्र गौण पत्थर नहीं
वह तो है --
शुद् सौ प्रतिशत आग, 
अभिप्रेत है स्पष्ट यहां 
जो गौण है ,जो दीन है 
परिस्तिथि विशेष में 
वह आपके अर्जित ज्ञान को 
निरुत्तर करने में प्रवीण है। 

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