अर्जित ज्ञान
------प्रभु दयाल खट्टर
कोयला मात्र एक गौण पत्थर है
अपनी हथेली पर रखो
होगा प्रतीत वह -
दीन है ,प्रभावहीन है ,
लेकिन कब तक ?
जब तक अग्निविहीन है.
जब वह आग्नेय हो जाये
तब यदि कोई उसे बनाये
निज हथेली का भाग
तब ही ज्ञात होगा कि
वह मात्र गौण पत्थर नहीं
वह तो है --
शुद् सौ प्रतिशत आग,
अभिप्रेत है स्पष्ट यहां
जो गौण है ,जो दीन है
परिस्तिथि विशेष में
वह आपके अर्जित ज्ञान को
निरुत्तर करने में प्रवीण है।
------प्रभु दयाल खट्टर
कोयला मात्र एक गौण पत्थर है
अपनी हथेली पर रखो
होगा प्रतीत वह -
दीन है ,प्रभावहीन है ,
लेकिन कब तक ?
जब तक अग्निविहीन है.
जब वह आग्नेय हो जाये
तब यदि कोई उसे बनाये
निज हथेली का भाग
तब ही ज्ञात होगा कि
वह मात्र गौण पत्थर नहीं
वह तो है --
शुद् सौ प्रतिशत आग,
अभिप्रेत है स्पष्ट यहां
जो गौण है ,जो दीन है
परिस्तिथि विशेष में
वह आपके अर्जित ज्ञान को
निरुत्तर करने में प्रवीण है।

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