Wednesday, 19 February 2020

कविता ;दिनमानों का निर्माण


कविता ;दिनमानों  का निर्माण 




---- प्रभुदयाल खट्टर

अनुभूतिओं के खौलते ज्वालामुखी जैसे 
प्रकाशपुंजों  से शाश्वत सत्य के -
दिनमानों का निर्माण अब दूर नहीं। 

यहां सब उन्मुक्त मेघों की तरह
आस के इंद्रधनुष बुन सकेंगें --
जो निष्कपट सरल मुस्कानों में -
अपने तम का सवेरा चुन सकेंगें ,
जो अपने अटूट बाहुबल से 
पुरुषार्थ की ऐसी इमारत गढ़ेंगे 
जिसमें भविष्य के अतिथि -
शौर्य के नवीन अध्याय पढ़ेंगे ,
जो घृणा से भरी रक्त नाड़ियों के विष को 
स्नेह के अमृत से सींचेंगे 
जो मस्तिष्क के निर्णयों के जलयान में भरा 
समस्त कुंठित जल लगातार उलीचेंगे ,
जो सदियों से रूढ़ियों में जकड़े 
घुटन से भरे सभी आलेखों को धो डालेगा 
उस तूफ़ान का प्रमाण अब दूर नहीं।  

अनुभूतिओं के खौलते ज्वालामुखी जैसे 
प्रकाशपुंजों  से शाश्वत सत्य के -
दिनमानों  का निर्माण अब दूर नहीं। 

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