Thursday, 20 February 2020

लापता मशाल का जिक्र

लापता मशाल का जिक्र 

---- प्रभुदयाल खट्टर

कालचक्र के दुरुह पथ पर 
मील के पत्थरों  की  जगह --
अब गाड़े जा रहे काल पात्र ,
और अलोकपुंजों  के 
वितरण  की पीढ़ीगत व्यवस्था 
अब जारी नहीं रही ,
भविष्य पुत्र जब मार्गदर्शक 
मशालों की ओर ताकेंगे ,
तब उनके अधिकार पत्रों में 
चिपकाये जायेंगे ---
इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ  ,
संभवत: इस से --
प्रकाश स्तम्भों का गौरव  झलके,
किन्तु तत्कालीन पीढ़ियों  से --
छिप नहीं सकेगा -
कि उनके आस पास से 
प्रकाश गुम  है ,
मशाल  गुम है जो कि 
स्वतंत्रता के बाद निरंतर 
प्रज्ज्वलित रखने के लिए 
उत्तराधिकारियों  को सौंपी गयी थी।

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