लापता मशाल का जिक्र
---- प्रभुदयाल खट्टर
कालचक्र के दुरुह पथ पर
मील के पत्थरों की जगह --
अब गाड़े जा रहे काल पात्र ,
और अलोकपुंजों के
वितरण की पीढ़ीगत व्यवस्था
अब जारी नहीं रही ,
भविष्य पुत्र जब मार्गदर्शक
मशालों की ओर ताकेंगे ,
तब उनके अधिकार पत्रों में
चिपकाये जायेंगे ---
इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ ,
संभवत: इस से --
प्रकाश स्तम्भों का गौरव झलके,
किन्तु तत्कालीन पीढ़ियों से --
छिप नहीं सकेगा -
कि उनके आस पास से
प्रकाश गुम है ,
मशाल गुम है जो कि
स्वतंत्रता के बाद निरंतर
प्रज्ज्वलित रखने के लिए
उत्तराधिकारियों को सौंपी गयी थी।
---- प्रभुदयाल खट्टर
कालचक्र के दुरुह पथ पर
मील के पत्थरों की जगह --
अब गाड़े जा रहे काल पात्र ,
और अलोकपुंजों के
वितरण की पीढ़ीगत व्यवस्था
अब जारी नहीं रही ,
भविष्य पुत्र जब मार्गदर्शक
मशालों की ओर ताकेंगे ,
तब उनके अधिकार पत्रों में
चिपकाये जायेंगे ---
इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठ ,
संभवत: इस से --
प्रकाश स्तम्भों का गौरव झलके,
किन्तु तत्कालीन पीढ़ियों से --
छिप नहीं सकेगा -
कि उनके आस पास से
प्रकाश गुम है ,
मशाल गुम है जो कि
स्वतंत्रता के बाद निरंतर
प्रज्ज्वलित रखने के लिए
उत्तराधिकारियों को सौंपी गयी थी।

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